Big Breaking : उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर लगी रोक को हाईकोर्ट ने हटाया
- चुनावी शेड्यूल में होगा मामूली फेरबदल
- जुलाई में ही होंगे चुनाव संपन्न
नवक्रान्ति समाचार
हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई के बाद उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर कोर्ट से लगी रोक को हटा दिया गया है। अब निर्वाचन आयोग चुनावी शेड्यूल तैयार करेगा, जिसमें मामूली सा फेरबदल होने की संभावना है और जुलाई माह में ही पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। इस खबर के बाद चुनाव की तैयारियों में जोर शोर से जुटे प्रत्याशियों के जो चेहरे पिछले एक सप्ताह से मुरझाए हुए से दिखाई दे रहे थे, उनमें एक बार फिर से रंगत लौट गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठ में आज हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने चुनाव पर लगाया गया स्टे हटा दिया गया है। जिसके बाद जुलाई में ही चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। अब नामांकन के लिए तीन दिन का समय बढाया गया है। जो सभी कार्यक्रमों के लिए जारी रहेगा। इस प्रकार सभी चुनावी प्रक्रियाओं में यह समय बढाया जाएगा। जिसमें लिए अब मामली फेरबदल के बाद राज्य निर्वाचन आयोग उत्तराखंड नया चुनावी शेड्यूल तैयार करेगा।
क्या है पूरा मामला?
बागेश्वर निवासी याचिकाकर्ता गणेश दत्त कांडपाल की आरक्षण से जुड़ी याचिका पर 23 जून को उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शोभित सहारिया ने पंचायत चुनावों में आरक्षण से संबंधित आपत्ति उठाई थी। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद चुनावों पर लगी रोक को हटा लिया।
इन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
आज की सुनवाई में पंचायत चुनावों में आरक्षण, क्षेत्र निर्धारण और आरक्षित सीटों को लेकर उठी लगभग 40 याचिकाओं को सुना गया। इन याचिकाओं में हर्ष प्रीतम सिंह, गंभीर सिंह चौहान, कवींद्र इस्तवाल, रामेश्वर, मो. सुहेल, सोबेन्द्र सिंह पड़ियार, प्रेम सिंह, विक्कार सिंह बाहेर, धर्मेंद्र सिंह और पंकज कुमार समेत कई नाम शामिल हैं।
इन सभी को बीरेंद्र सिंह बुटोला और गणेश दत्त कांडपाल की मूल याचिका के साथ जोड़कर सुना गया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:
अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण निर्धारित होता है।
शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिए होती हैं।
महिलाओं को प्रत्येक वर्ग में 33% आरक्षण का प्रावधान है।
मुख्य न्यायाधीश का बयान
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र ने स्पष्ट कहा कि “हम मेरिट के आधार पर सभी पक्षों को सुनेंगे।” इसके साथ ही 23 जून को जारी स्टे को समाप्त कर दिया गया और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया को जारी रखने के निर्देश दिए।

