हरेला पर्व पर उत्तराखंड ने रचा इतिहास, सभी जिलों में जनसहभागिता से हुआ वृक्षारोपण
- प्रधानमंत्री की प्रेरणा, मुख्यमंत्री का नेतृत्व कृ उत्तराखंड में हरेला पर्व बना पर्यावरण जागरण
- उत्तराखंड में हरेला पर्व बना हरित क्रांति का उत्सव, 8 लाख 13 हज़ार से अधिक पौधे रोपे गए
- ’एक पेड़ माँ के नाम’ से ‘धरती माँ का ऋण चुकाओ’ तकः उत्तराखंड में हरेला पर्व बना जनआंदोलन
- 8 लाख से अधिक पौधे, 13 जिले, एक संदेश कृ हरेला पर्व पर उत्तराखंड का हर कोना हरियाली में रंगा
नवक्रान्ति समाचार
यह केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसी पहल है जो प्रदेशवासियों में प्रकृति के प्रति आस्था, उत्तरदायित्व और संरक्षण की भावना को और गहरा कर रही है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पर्व दर्शाता है कि उत्तराखंड केवल एक हिमालयी राज्य नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जागरूक और सक्रिय समाज का प्रतीक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विकास और आस्था, दोनों के संतुलन के साथ आगे बढ़ रही है और पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्राथमिक नीति का अभिन्न हिस्सा है।मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हरेला पर्व अब केवल सांस्कृतिक पर्व नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेशवासियों की सामूहिक चेतना का उत्सव बन गया है। पौधों के रूप में जो बीज धरती में रोपे जा रहे हैं, वे हरियाली, उम्मीद, आस्था और सतत विकास के प्रतीक हैं। आने वले वर्षों में यही बीज एक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संवेदनशील उत्तराखंड के निर्माण में आधार बनेंगे।

