चारधाम यात्रा रूटों के अस्पतालों का चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने किया औचक निरीक्षण

चारधाम यात्रा रूटों के अस्पतालों का चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने किया औचक निरीक्षण

  • चार अस्पतालों की जांची सुविधाएं, व्यवस्थाएं और जाना मरीजों का हाल
  • रूद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, गुप्तकाशी और जखोली अस्पताल का किया निरीक्षण

रूद्रप्रयाग/ नवक्रान्ति समाचार 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर चारधाम यात्रा के रूटों के अस्पतालों में चिकित्सा सेवा को सुव्यवस्थित करने तथा अस्पतालों में जरूरतों को लेकर चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने रूद्रप्रयाग जिले के सीएचसी अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, जखोली और गुप्तकाशी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सो, वार्ड व्यॉय, सफाई कर्मी की तैनाती से लेकर दवा एवं चिकित्सकीय उपकरणों की जानकारी ली। यहीं नहीं अस्पतालों में संसाधनों को किस तरह से उपयोग करना है, इस पर सीएमओ स्तर पर रिव्यू कराने के निर्देश दिये। साथ ही टेलीमेडिसिन के जरिए इन अस्पतालों को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से जोड़कर मरीजों को चिकित्सा सुविधा देने का भरोसा दिया।

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि अगस्त्यमुनि अस्पताल में जगह की काफी कमी है और जो अस्पताल की बिल्डिंग बनी है, वह प्लानिंग से नहीं बनायी गयी है। वहां तैनात डॉक्टरों एवं कर्मियों को आवास की असुविधा है। अस्पताल का विस्तार होना चाहिए। कहा कि ब्लड़ टेस्ट के लिए चंदन लैब एवं अस्पताल स्तर से हो रहे है, किंतु कुछ टेस्ट बंद किये है, जिससे मरीज परेशान रहते है। इसको लेकर भी जल्द कार्यवाही की जायेगी। अगस्त्यमुनि में एक आयुर्वेदिक अस्प्ताल भी स्थापित है, इस तरह से अस्पतालों की उपयोगिता को लेकर भी सीएमओ स्तर पर रिव्यू किया जायेगा। अस्पताल में कोई भी सामान कहीं भी लगा दिया गया है, जिससे अस्पताल में अव्यवस्था का अंबार बना हुआ है।

डॉ. सयाना ने अगस्त्यमुनि के बाद ऊखीमठ अस्पताल का निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने पाया कि अस्पताल तक सीधी सड़क नहीं है। इससे गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़कर अस्पताल आना पड़ता है। आवास व बिजली जैसी समस्या वहां भी थी। डेंटल डॉक्टर है, जो क्षेत्र के मरीज को अच्छी सेवाएं दे रहे है। किंतु डॉक्टर के साथ डेंटल हाइजीनिस्ट की तैनाती की मांग की गई। इसके साथ ही गुप्तकाशी अस्पताल का निरीक्षण कर वहां की तमाम व्यवस्थाएं देखी। जहां फिजिशियन की तैनाती की बात कही गई। डॉ. सयाना ने बताया कि गुप्तकाशी के पास जल्द उप जिला चिकित्सालय का निर्माण हो रहा है, जिसमें भी सड़क मार्ग से लेकर तमाम निर्माण कार्य प्लानिंग से किया जाना होगा। ताकि मरीजों को दिक्कतें ना हो। कहा कि जखोली अस्पताल में तमाम व्यवस्थाएं देखी गई। जिसमें जो-जो कमी है, उन्हें पूरा करने के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जायेगी। डॉ. सयाना ने कहा कि निरीक्षण के दौरान ऊखीमठ में क्षेत्रीय विधायक आशा नौटियाल से मुलाकात की गई, जिनसे भी अस्पतालों की बेहतरी के लिए ठोस कार्य योजना बनाने की बात कही गई। इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोपाल सजवाण, अमित नौडियाल, अमित मैठानी, राहुल नेगी सहित अन्य डॉक्टर व कर्मी मौजूद थे।

अगस्त्यमुनि में सबसे ज्यादा पेट खराब होने के मरीज आते

चिकित्सा शिक्षा निदेशक एवं श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सयाना ने बताया कि सीएचसी अगस्त्यमुनि में सबसे अधिक पेट खराब होने के मरीज पहुंचे है, जिसमें अधिकांश में पथरी की शिकायत बतायी गई। कहा कि इस संदर्भ में क्षेत्र के पानी के सैंपल की जांच कराने तथा साफ-सफाई पर ध्यान देने के लिए निर्देशित किया जायेगा। ताकि पेट खराब रहने की दिक्कत का पता लगाया जा सके। जबकि कालीमठ क्षेत्र में दांत खराब ज्यादा होने की शिकायत पर उन्होंने कहा कि जल्द श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से डेंटल विभाग की टीम कैंप लगाने के साथ ही इस पर रिसर्च करेगी।

अस्पतालों में सफाई सेवकों, सुरक्षा कर्मी व वार्ड व्यॉय की कमी

चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने निरीक्षण में पाया कि अस्तपालों में सफाई करने वाला एक ही सफाई कर्मी तैनात है, जबकि सुरक्षा कर्मी एवं वार्ड व्यॉय की कमी देखी गई। कहा कि पद स्वीकृत ना होने की बात स्थानीय स्तर पर बतायी गई। किंतु आउटसोर्सिंग के माध्यम से इन पदों को दिया जाना चाहिए, ताकि अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठीक रहे।

बोले, टेलीमेडिसिन जरिए मरीजों को दी जायेगी सुविधा

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि चारधाम यात्रा के मुख्य अस्पताल के डॉक्टरों को टेलीमेडिसिन के जरिए मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से जोड़ा जायेगा और इन अस्पतालों के डॉक्टरों के समन्वय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के साथ बनाया जायेगा। ताकि टेलीमेडिसिन के जरिए अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, जखोली गुप्तकाशी में आने वाले मरीजों को अपनी परेशानी का हल हो सके और उन्हें वेवजह छोटी परेशानी के लिए दून या अन्य जगह ना जाना पड़े। कहा कि गंभीर परेशानी होने पर श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचकर इलाज के लिए आ पाये। टेलीमेडिसिन के जरिए मरीजों को जितनी सुविधा मिल सके, वह दिलाई जायेगी। ताकि मरीजों को वेवजह अपना समय, एनर्जी और आर्थिक नुकसान ना उठाना पड़े।

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