नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में विभाजन की विभीषिका पर मंथन, विद्यार्थियों से एकता का आह्वान

नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में विभाजन की विभीषिका पर मंथन, विद्यार्थियों से एकता का आह्वान

रुद्रप्रयाग / नवक्रान्ति समाचार

आज दिनांक 14 अगस्त 2026 को हिमवन्त कवि चन्द्रकुँवर बर्त्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर ‘विभाजन की विभीषिका’ विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत विभाजन की त्रासदी, उसके ऐतिहासिक कारणों तथा राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव के महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रीटा शर्मा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारत विभाजन का इतिहास अत्यंत पीड़ादायक रहा है, जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका केवल अतीत की एक घटना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। हमें इस त्रासदी से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता तथा संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए सतत प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इतिहास से सीख लेकर आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रेनू सनवाल ने इस अवसर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए नई पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर आईक्यूएसी (IQAC) समन्वयक डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारत का विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि यह विचारों, सामाजिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं के विखंडन का भी प्रतीक था। उन्होंने विभाजन के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, उसके राजनीतिक एवं सामाजिक कारणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास से मिली सीख को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आपसी संवाद, सामाजिक सद्भाव, सहिष्णुता तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

डॉ. प्रवीण मैठाणी ने कहा कि भारत विभाजन की त्रासदी का मार्मिक चित्रण भारतीय साहित्य में हुआ है। उन्होंने बताया कि विभाजन साहित्य मानवीय पीड़ा, विस्थापन और सामाजिक विघटन को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करते हुए समाज को शांति, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है।

डॉ. रामानंद उनियाल ने विभाजन के ऐतिहासिक, राजनीतिक एवं सामाजिक कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस त्रासदी के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए तथा असंख्य निर्दोष लोग काल कवलित हो गए। उन्होंने विद्यार्थियों को इतिहास से सीख लेकर सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छात्र शिवम पंत एवं छात्रा कु. मेघा ने भी विभाजन की विभीषिका पर अपने विचार व्यक्त किए तथा सामाजिक सौहार्द एवं राष्ट्रीय एकता बनाए रखने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के डॉ. रेखा चमोली, डॉ. शाजिया सिद्दीकी, डॉ. कीर्ति गिल, डॉ. शशि चौहान, डॉ. श्वेता रावत, डॉ. किरन चौहान, डॉ. आरती रावत, डॉ. अनुपम रावत, डॉ. आयुष बर्त्वाल, डॉ. सोहनी, डॉ. प्रियंका घिड़ियाल, डॉ. केवलानन्द, श्री दिनेश नेगी सहित समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।