सत्य, अहिंसा और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान, नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में मनाई गांधी-शास्त्री जयंती

सत्य, अहिंसा और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान, नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में मनाई गांधी-शास्त्री जयंती

रुद्रप्रयाग / नवक्रान्ति समाचार

आज दिनांक 02.10.2026 को हिमवन्त कवि चन्द्र कुँवर बर्त्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रीटा शर्मा द्वारा महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन IQAC समन्वयक डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इसके उपरांत उपस्थित प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके जीवन, विचारों एवं राष्ट्र के प्रति योगदान पर विचार व्यक्त किए गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ0 रीटा शर्मा ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उपस्थित सभी प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, सादगी, आत्मानुशासन एवं मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है। वहीं लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्रसेवा के आदर्शों का प्रतीक है। दोनों महान व्यक्तित्वों के विचार एवं जीवन-मूल्य आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया।

IQAC समन्वयक डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव ने मंच संचालन के दौरान महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन एवं विचारों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा, जबकि शास्त्रीजी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दोनों महापुरुषों के जीवन-मूल्यों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बताया।

डॉ. रामानंद उनियाल ने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से जनसामान्य को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा। उन्होंने विद्यार्थियों से गांधीजी के विचारों एवं आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

डॉ. रेखा चमोली ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधीजी का सत्य और अहिंसा का दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में भी सामाजिक शांति, सद्भाव एवं मानव मूल्यों की स्थापना के लिए प्रासंगिक है।

इस अवसर पर एम.ए. के छात्र मानवेंद्र ने भी महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन एवं राष्ट्र के प्रति योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों तथा लाल बहादुर शास्त्री के ‘जय जवान, जय किसान’ के संदेश के संदर्भ में भी उनके जीवन-मूल्यों पर चर्चा की गई। उपस्थित सभी सदस्यों ने दोनों महान विभूतियों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. योगेश भट्ट, डॉ. रेनू सनवाल, डॉ. शाजिया सिद्दीकी, डॉ. कीर्ति गिल, डॉ. शशि चौहान, डॉ. श्वेता रावत, डॉ. किरन चौहान, डॉ. आरती रावत, डॉ. अनुपम रावत, डॉ. आयुष बर्त्वाल, डॉ. प्रवीण मैठाणी, डॉ. सोहनी भंडारी, डॉ. प्रियंका घिड़ियाल, श्री दिनेश नेगी, श्री दिगम्बर सिंह, श्री विमल विष्ट, श्री शिवा कुंवर, श्री विक्रम कंडारी, श्री चंदन सिंह, श्री चंद्रेश भट्ट, श्रीमती ललिता भंडारी, श्री सतीश चमोला, श्री नवनीत, श्री विजयपाल, श्री विजय कुमार, श्री प्रबल, श्री प्रदीप सिंह, श्री अनिल कुमार एवं श्री दीपक सिंह सहित समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।