रुद्रप्रयाग में लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम को अभियान तेज, गांवों में जागरूकता के साथ टीकाकरण जारी
रुद्रप्रयाग /नवक्रान्ति समाचार
उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों के कुछ जनपदों में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत रुग्ण पशुओं का उपचार, स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण, पशुपालकों को जागरूक करने के लिए गोष्ठियों का आयोजन तथा कीटनाशक, परजीवीनाशक, रोग-प्रतिरोधक क्षमता वर्धक एवं अन्य आवश्यक औषधियों का वितरण किया जा रहा है।
इसी क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग में भी करीब दो दर्जन टीमों का गठन कर गांव-गांव जाकर लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए टीकाकरण, जागरूकता एवं औषधि वितरण का अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र भ्रमण कर पशुपालकों को रोग के लक्षण, बचाव एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दे रही हैं।
पशु चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सचल की टीम द्वारा ग्राम बष्टी में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का नेतृत्व पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना थपलियाल ने किया। इस दौरान वैक्सीनेटर एवं अन्य कार्मिक भी मौजूद रहे। शिविर में करीब 35 पशुपालकों ने प्रतिभाग किया। पशुपालकों को लंपी स्किन डिजीज के लक्षण, संक्रमण से बचाव एवं पशुओं के टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई।
शिविर के दौरान करीब 92 पशुओं के लिए आवश्यक औषधियों का वितरण किया गया, जबकि टीम द्वारा घर-घर जाकर 70 पशुओं का टीकाकरण भी किया गया।
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि जनपद में स्थापित 16 पशु चिकित्सालयों द्वारा टीमें गठित कर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही पशुओं का टीकाकरण करने के साथ कीटनाशक, परजीवीनाशक, रोग-प्रतिरोधक क्षमता वर्धक एवं अन्य आवश्यक औषधियों का वितरण भी किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी द्वारा जनपद की सभी नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में कीटनाशक औषधियों का स्प्रे एवं फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों के अनुपालन में संबंधित निकायों द्वारा कार्रवाई गतिमान है।
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को लंपी स्किन डिजीज एवं परजीवियों से बचाव के लिए आवश्यक औषधियां अपने निकटतम पशु चिकित्सालय से प्राप्त करें तथा पशुओं का टीकाकरण अनिवार्य रूप से करवाएं। उन्होंने पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा पशुपालन विभाग को सूचना देने की भी अपील की।

