नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में उद्यमिता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र

नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में उद्यमिता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र

रुद्रप्रयाग /नवक्रान्ति समाचार

 

आज दिनांक 16 सितंबर 2026 को हिमवंत कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत एक दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रीटा शर्मा ने की, जबकि कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव रहे।

 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक के रूप में भारतीय उद्यमिता संस्थान, गुजरात से पधारे श्री विनोद नेगी ने प्रतिभागियों को उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ एवं प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रीटा शर्मा ने कहा कि आज के बदलते आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में विद्यार्थियों के लिए केवल पारंपरिक रोजगार के अवसरों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता, कौशल, नवाचार एवं स्थानीय संसाधनों को पहचानते हुए उन्हें उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प, कृषि, पर्यटन तथा अन्य स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों की व्यापक संभावनाएँ हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों की जानकारी प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने देवभूमि उद्यमिता योजना को विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करने तथा स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

 

मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक श्री विनोद नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उद्यमिता की अवधारणा, उद्यमी बनने के लिए आवश्यक गुणों तथा उपलब्ध अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उद्यमिता का अर्थ केवल व्यवसाय शुरू करना नहीं है, बल्कि किसी समस्या की पहचान कर उसके लिए नवीन एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास की आवश्यकताओं और स्थानीय संसाधनों को अवसर के रूप में देखें तथा छोटे स्तर से अपने उद्यम की शुरुआत करने का प्रयास करें। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम, नवाचार, कौशल विकास, बाजार की समझ, डिजिटल माध्यमों के उपयोग तथा वित्तीय प्रबंधन को सफल उद्यमिता के महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करने, असफलताओं से सीखने तथा निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया।

 

कार्यक्रम का संचालन देवभूमि उद्यमिता योजना के नोडल अधिकारी डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने देवभूमि उद्यमिता योजना के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योजना का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, उनके भीतर नवाचार एवं उद्यमशीलता की भावना विकसित करना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं स्टार्टअप के संभावित अवसरों से परिचित कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों को योजना के माध्यम से उपलब्ध प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं अन्य अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

 

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्यमिता की संभावनाओं, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, नवाचार एवं स्वरोजगार के विभिन्न आयामों की जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार की सोच से आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भरता, नवाचार एवं उद्यमशीलता की दिशा में प्रेरित करना रहा।

 

कार्यक्रम में महाविद्यालय के मुख्य शास्ता डॉ. शिवचंद सिंह रावत, डॉ शाजिया सिद्दीकी, डॉ. कंचन सहगल, डॉ. किरन चौहान, डॉ. शशि चौहान, डॉ. आरती रावत, डॉ. अनुपम रावत, डॉ. केवला नन्द, डॉ. भगवती पंत, डॉ. सोहनी, डॉ. प्रियंका घिड़ियाल, श्री विक्रम सिंह कंडारी, श्री नवनीत सती एवं श्री दीपक रावत सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।